२४ तीर्थंकर नाम और चिन्ह लांछन /निशान :૨૪ તીર્થંકર || 24 TIRTHANKARS WITH LANCHANS IN ENGLISH HINDI AND GUJRATI : २४ तीर्थंकर नाम और लांछन /निशान / चिन्ह || To download AAO JINJI 24 TIRTHANKAR VONDSU SONG click HERE || JAIN 24 TIRTHANKAR WITH LACHAN FREE MP3 || 24 TIRTHANKARA/२४ तीर्थंकर नाम और चिन्ह/ लांछन /निशान 24 TIRTHANKARAS WITH LANCHANS 24 TIRTHANKARAS WITH LANCHANS Below para is taken from : http://jainworld.com/jainbooks/tirthankar/apendix-5.htm The Symbol of Tirthankar: A Study There are twenty four Tirthankars. Every Tirthankar has a specific representative symbol that is known as Lanchan". Generally all the idols of Tirthankars are similar except for Parshvanath which has a serpent hood over the head. Some idols of Rishabhdev show locks or a bun of hair on the head. Suparshvanath idols too have a serpent hood sometimes but there is a marked difference from that over Parshvanath. The hood over Suparshvanath has five serpent heads whe...
तीन लोक रचना जम्बूद्वीप तीर्थ पर निर्मित तीनलोक रचना जम्बूद्वीप तीर्थ पर विश्व में प्रथम बार निर्मित एक और रचना है,जिसे 'तीनलोक' कहा जाता है | इस रचना में जैन धर्म के अनुसार अधोलोक, मध्यलोक एवं ऊर्ध्वलोक की अवस्थिति प्रदर्शित की गई है, जिसमें अधोलोक में भवनवासी, व्यंतर आदि देवों के भवन, जिनमंदिर तथा 7 नरक व वहाँ उपस्थित नारकियों की दशा, मध्यलोक में पंचमेरू पर्वत आदि तथा ऊर्ध्वलोक में 16 स्वर्ग में रहने वाले देवों का ऐश्वर्य, भव्य जिनमंदिर, नवग्रैवेयक,नवअनुदिश,पंच अनुत्तर व सबसे ऊपर सिद्धशिला आदि प्रदर्शित किये गये हैं | इस रचना में विराजमान की गई समस्त प्रतिमाएं पंचकल्याणक पूर्वक प्रतिष्ठित हैं |"अच्छे कार्यों से शुभ फलस्वरूप स्वर्ग व मोक्ष का वैभव एवं बुरे कार्यों के अशुभ फलस्वरूप नरक की वेदना",इस रचना के दर्शन से प्रत्येक जनमानस को यही सन्देश प्राप्त होता है | विशेषता- इस रचना में लिफ्ट के द्वारा सेकेण्डों में सिद्धशिला तक पहुँचा जा सकता है | यहाँ लिफ्ट की भी सुन्दर ब्यवस्था है , जिससे अशक्त यात्री भी ऊपर तक जाकर वन्दना का लाभ लेते हैं । तथा सीढ़ियों से भी ऊपर सिद्ध...
तीन मूर्ति मंदिर भगवान आदिनाथ,भरत एवं बाहुबली की खड्गासन प्रतिमाओं से इस मंदिर का नाम सार्थक है | कमल पर विराजमान भगवान नेमिनाथ एवं पार्श्वनाथ से इस मंदिर की शोभा द्विगुणित हो गयी है | देश विदेश से लोग यहाँ दर्शन करने आते है |जब भक्त लोग ये तीन मूर्तियों पर पंचामृत अभिषेक करते है तो भक्त जन अपने पुण्य की सरहना भी करते है और भगवान नेमिनाथ की पद्मासन प्रतिमा जो की हरे पाषाण की है वह बहुत आकर्षण और मनोहारी भी लगती है जब इस पे भक्त जन दूध का अभिषेक करते है तो यह दृश्य मन को लुभाता है और इन प्रतिमा में इनके चिन्ह अलग से भी नीचे दर्शाये गए है |और श्वेत कमल व श्वेत हंस भी इन प्रतिमा के साथ भी बने हुए है| ये दृश्य तीन मूर्ति मंदिर के बाहर के दरवाजे का है यात्री जब भी इस दर्शन हेतु आते है तो बाहर से ही पता चल जाता है की ये तीन मूर्ति मंदिर है और यह मंदिर नं०-2 है |
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