ओम मंदिर
ओम मंदिर
अरिहंत ,सिद्ध,आचार्य उपाध्याय और साधु परमेष्ठियों की प्रतिमाओं सहित ॐ (ओम) रचना इस मंदिर में विराजमान है |
ॐ मंदिर में विराजमान पंचपरमेष्ठी भगवन्तों की प्रतिमाओं से संयुक्त ग्रेनाइट का विशाल ॐ
पूज्य माता जी की प्रेरणा से जम्बूद्वीप स्थल पर प्रथम बार इस ओम मंदिर का निर्माण किया गया है | जिसमे ॐ की रचना में पंच परमेष्ठी भगवान विराजमान किये गये है |
ओम का अर्थ -
अरिहंता असरीरा,आइरिया तह उवज्झाया मुणिणो |
पढ़मक्खरणिप्पण्णो, ओंकारो पंच परमेट्ठी |
अर्थ- अरिहंत का प्रथम अक्षर 'अ,अशरीर (सिद्ध) का 'अ' आचार्य का 'आ',उपाध्याय का 'उ', और मुनि (साधु) का 'म्' इस प्रकार पंचपरमेष्ठियों के प्रथम अक्षर (अ + अ + आ + उ + म्) को लेकर 'स्वेऽको दी' और 'आदूगुण:' सूत्र से संधि करने पर 'ओम' मन्त्र सिद्ध होता है | इससे यह पंचपरमेष्ठी का वाचक है |
इस मंदिर में ॐ में अरिहंत,सिद्ध ,आचार्य,उपाध्याय और साधु इन पंचपरमेष्ठियों की प्रतिमाएँ वीर नि.सं.२५२४ माघ शु.१५ दिनाँक ११-०२-१९९८ को विराजमान की गई है
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